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सोमवार, 20 जून 2011

मैं रोया सारी रात बहुत ......


एक रात हुई बरसात बहुत,
मैं रोया सारी रात बहुत,
हर गम था जमाने का लेकिन,
मैं तन्हा था उस रात बहुत... ... ...

फिर आंख से एक सावन बरसा,
जब सहर हुई तो खयाल आया,
वो बादल कितना तन्हा था,
जो बरसा सारी रात बहुत ... ... ...

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